उस वक़्त को मैं अपनी ओर आते देख रहा था जो मेरा अपना नहीं था। वक़्त को मैंने जीवन से उधार लिया था बदले में वादा किया था कि मैं अपना जीवन उसे दे दूंगा। पर मुझे उधारी पसंद नहीं है इसलिए मैंने वक़्त को वक़्त लौटा दिया और अपने हिस्से का अकेलापन वापस ले लिया। क्योंकि अकेलेपन की गोद में बैठकर मैं ख़ुद को ज़्यादा खोज लेता हूँ। ऐसा नहीं है की ख़ुद को खोजे जाने के लिए हमेशा अकेला होना ज़रूरी है पर यह ज़रूरी है की जिसके साथ आप जीवन को खोज रहे हो या जो उस वक़्त आपके साथ है- वो ईमानदार हो। क्योंकि भरोसे पर ही तो दुनिया टिकी है। वक़्त और मेरे बीच जन्म से ही यह भरोसा कायम है तभी तो जब चाहे मैं अपने जीवन से वक़्त को उधार मांग लेता हूँ और वो मुझे मेरे अकेलेपन से दूर ले जाता है। मैं तुमसे उतना ही साथ मांग रहा हूँ जितना लौटाया जा सके। उससे तनिक भी ज़्यादा नहीं |
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