तकरीबन 5 साल गुज़र गए होंगे | मैं उससे मिला ही इसलिए था क्योंकि कोई टीस थी मेरे मन में, जो उससे मिलकर मैं निकालना चाहता था | पर अपने बारे में यह ज़रूर स्वीकार करता हूँ की उसका स्कूल के दिनों में किसी और को चुनना सालता था | उससे कहीं ज़्यादा सालता था अपना हारना | मैं प्रेम में नहीं, पर अलगाव के बाद हार जीत देखता हूँ | हार मुझे कई सालों तक मारती है | ख़ैर, मेरे कहने पर वो होटल तो आ गई थी | लेकिन अभी बड़ी नहीं हुई थी | मेरा ईमान अब भी ज़िंदा था | पहली प्रेम की और अब ईमान की हार, सुबह मैंने उसे हॉस्टल छोड़ दिया | धीरे धीरे इंसान यादों से रिसता जाता है और उसकी कोई स्मृति शेष नहीं रह जाती | फ़रवरी का यह आखिरी सप्ताह है |
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Tuesday, 20 July 2021
Sunday, 26 April 2020
फितरती अतीत
रिया अलहदा पागल है | एक दिन अनजाने नम्बर से एक लड़की का फ़ोन आया उसने मुझे एक दुखभरी कहानी सुनाई | लिहाज़ा मैं पहली बार किसी ऐसी लड़की से भिड़ रहा था सो मैंने उसे कंधा दे दिया | उसने कहा की क्या हम दोस्त हो सकते हैं? इसमें अचरज तो कुछ था नहीं, मैंने हाँ बोल दिया | दूसरे दिन बात पसंद तक आ गई | दो चार दिन बीतें होंगे और उसने प्रोपोज़ कर दिया | कुछ दिन मैंने टाला |असल में मैं भी किसी के प्यार में पढ़ना चाहता था पर हमारी frequency कतई मैच नहीं कर रही थी, सो मैंने उसे रिप्लाई करने में कोई जल्दबाज़ी नहीं की | मैंने बस उसे यह विश्वास दिलाया की अपने पास्ट से बाहर निकलने में अगर उसे लगता है की मेरी ज़रूरत है, तो अपने अकेलेपन में मुझसे बात कर सकती है | गुरु पास्ट तो हमारा भी है पर रोना गाना किसी के सामने नहीं किया | सिवाय एक दोस्त के वो भी इसलिए क्यूंकि वो जिगरी है | और जिगरी यार तो जिगरी होते हैं, वो होते ही इसलिए हैं की हम उनके सामने रो सकें | और आखिरकार मुझे समझ आया की उसका रोना फितरती है, जो बिलकुल मेरे बर्दास्त के बाहर है | मैंने उसे सॉरी कहा और किसी भी किस्म का रिश्ता न रखने की बात कही | क्यूंकि असल में, मैं उनकी बिलकुल मदद नहीं कर सकता जो खुद अपनी हेल्प नहीं चाहते | चंद रोज़ पहले कइयों बार उसके कॉल आने, इज़हार करने के बाद आखिरकार यह किस्सा भी तमाम हुआ |
न हुई तब्दीली
सीमा से मैं हमेशा कहना चाह रहा था की मैं असल में वो नहीं हूँ जिसे वो तलाश रही है | वो कभी कभार कोशिश करती रही और अपने खाली वक़्त में, मैं उसे कभी कभार बात| दोस्तियाँ आजकल बहुत अस्थिर होती हैं या होती ही नहीं हैं | जब उसने मुझसे बातचीत थी, मैं समझ गया था वो मुझे पसंद करती है | किस्सा पसंद या प्यार से शुरू हो तो औंधे मुहँ गिरता है | कुछ दिनों बाद न नुकुर करते हुए उसने एक दिन कह दिया की वो मुझे पसंद करती है | मैंने कहा जाने दो | बाबजूद एक दिन उसने मुझे प्रोपोज़ कर दिया | उस वक़्त मैंने यह कह कर की मैं दूर दराज़ रहने वालों के प्यार में नहीं पड़ता मैंने टाल दिया और मैं टालता रहा | टालना कभी किसी निर्णय तक नहीं ले के जाता | किसी एक को तो आगे चलना होता है अक्सर मैं यह गलती करता हूँ सो चंद रोज़ पहले हर तरह से मैंने उसे ब्लॉक कर दिया | प्रेम और पसंद असल में दोस्ती में तब्दील हो यह वाकई मुश्किल है | दोस्त दोस्त की तरह मिलना चाहिए |
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