Tuesday, 20 July 2021

बार बार

तकरीबन 5 साल गुज़र गए होंगे | मैं उससे मिला ही इसलिए था क्योंकि कोई टीस थी मेरे मन में, जो उससे मिलकर मैं निकालना चाहता था | पर अपने बारे में यह ज़रूर स्वीकार करता हूँ की उसका स्कूल के दिनों में किसी और को चुनना सालता था | उससे कहीं ज़्यादा सालता था अपना हारना | मैं प्रेम में नहीं, पर अलगाव के बाद हार जीत देखता हूँ | हार मुझे कई सालों तक मारती है | ख़ैर, मेरे कहने पर वो होटल तो आ गई थी | लेकिन अभी बड़ी नहीं हुई थी | मेरा ईमान अब भी ज़िंदा था | पहली प्रेम की और अब ईमान की हार, सुबह मैंने उसे हॉस्टल छोड़ दिया | धीरे धीरे इंसान यादों से रिसता जाता है और उसकी कोई स्मृति शेष नहीं रह जाती | फ़रवरी का यह आखिरी सप्ताह है |    

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