Sunday, 26 April 2020

न हुई तब्दीली

सीमा से मैं हमेशा कहना चाह रहा था की मैं असल में वो नहीं हूँ जिसे वो तलाश रही है | वो कभी कभार कोशिश करती रही और अपने खाली वक़्त में, मैं उसे कभी कभार बात| दोस्तियाँ आजकल बहुत अस्थिर होती हैं या होती ही नहीं हैं | जब उसने मुझसे बातचीत थी, मैं समझ गया था वो मुझे पसंद करती है | किस्सा पसंद या प्यार से शुरू हो तो औंधे मुहँ गिरता है | कुछ दिनों बाद न नुकुर करते हुए उसने एक दिन कह दिया की वो मुझे पसंद करती है | मैंने कहा जाने दो | बाबजूद एक दिन उसने मुझे प्रोपोज़ कर दिया | उस वक़्त मैंने यह कह कर की मैं दूर दराज़ रहने वालों के प्यार में नहीं पड़ता मैंने टाल दिया और मैं टालता रहा | टालना कभी किसी निर्णय तक नहीं ले के जाता | किसी एक को तो आगे चलना होता है अक्सर मैं यह गलती करता हूँ सो चंद रोज़ पहले हर तरह से मैंने उसे ब्लॉक कर दिया | प्रेम और पसंद असल में दोस्ती में तब्दील हो यह वाकई मुश्किल है | दोस्त दोस्त की तरह मिलना चाहिए | 

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