2017 में ब्लॉग
शुरू किया था | 18 के
जून तक पहला कविता
संग्रह आ गया था
| ब्लॉग के थ्रू गया
तो देखा 19 में एक शब्द
भी नहीं लिखा गया
| 19 भोपाल से बम्बई में
शिफ्टिंग की ज़द्दोजहद का
समय रहा पर इतना
समय भी नहीं लगता
| ज़्यादा कोशिश 'रोल' हासिल करने
की कोशिश में बीता | अंततः
सारी कोशिश बेबुनियाद रही लेकिन इतना
तो है की वो
सारे रास्ते पता चल गए
जिन पर नहीं चलना
है | नोटबुक का निर्माण भी
18 की बात है | 20 का
चौथा महीने लगने वाला है
अब फिर से कोशिशों
का रुख उसी तरफ
मोड़ना है जैसा भोपाल
के दिनों में था | कितना
सारा थिएटर, लेखन, फिल्म निर्माण, अभिनय सब कर लेता
था | पिछले साल बम्बई में
खाली ज़्यादा गुज़रा और काम काम
किया | नीरज पांडेय निर्देशित
'Special Ops' रिलीज़ हुई है कुछ
समय बतौर कास्टिंग असिस्टेंट
उसमे काम किया था
| कुछ समय बाद उसे
भी बीच में छोड़
दिया और अच्छा हुआ
| देर आय दुरुस्त आये,
समझ तो आया क्या
नहीं करना है | पिछली
जुलाई के दौरान 'धीरज
मिश्रा' एपिसोडिक सीरियल 'वीर क्रांतिकारी' में
अभिनय किया था पर
उसकी झलकियां देखी नहीं | पर
इस साल मार्च में
अमित सैनी सर ने
क्राइम अलर्ट के एक एपिसोड
में कास्ट कर दिया | एक
मिनट का एक ही
सीन था मेरी करने
की मंशा तो नहीं
थी पर सर को
मैं न कह न
सका | घर में सबने
एपिसोड देखा | सब खुश थे
| मैंने भी खुद की
पहली बार टीवी पर
झलकियां देखीं | स्क्रीन पे होने की
ख़ुशी सचमुच अलग होगी | अभी
वो रास्ता जितना सोचा है उतना
इख्तियार करना है | फरवरी
अनुभवों से भरा हुआ
रहा | रिलायंस मार्किट के एक कमर्शियल
में बतौर कास्टिंग एसोसिएट
और असिस्टेंट डायरेक्टर भी जुड़ा रहा
| असिस्टेंट डायरेक्टर के काम का
यह पहला अनुभव था
| बहरहाल इस साल की
शुरुआत खूबसूरत हुई है | काम
की भी शुरुआत बन
रही है | अच्छे लोगों
से वास्ता भी पढ़ रहा
है और अपना काम
भी मैंने नए सिरे से शुरू
कर दिया है |
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