Monday, 6 April 2020

सन्नाटे का शोर

सिगरेट, कॉफ़ी और डायरी लेकर सीढ़ियों पे बैठ गया आज, जब से लॉक डाउन हुआ है कमरे के कोने में पड़े पड़े बेतहाशा बोर हो गया था | लगातार लिख रहा था, फ़िल्में देख रहा था, आजकल पड़ने का मन नहीं है | पिछले दो दिनों से लाइव गेमिंग के बहाने दिल बहला रहा हूँ | काम ही जो मुझे ज़िंदा रखता है | दोनों रूममेट अपनी प्रेमिकाओं के साथ मसगूल हो जाते हैं | अपनी जिंदगी में कोई ख़ास जैसा नहीं है, जिससे बात की जा सके इसलिए इन दिनों बोरियत ज़्यादा रहती है | बीती रात एक निर्णय तो कर ही लिया था जिसपे पिछली पोस्ट लिख दी है अब और उसके बारे में नहीं सोचूंगा | पड़ोस में एक अंकल रहते हैं | मुस्लिम हैं, बड़ा ही नेक दिल है | मैंने अब तक उनका नाम नहीं पूछा | अक्सर आते जाते जब भी टकराते हैं, ख्याल पूछते हैं | लॉकडाउन से पहले से कह रहे हैं पैसे ले जाओ और घर जाओ | ज़रूरत हो तो कह देना, कभी भी कितने भी पैसे की | मैं हाँ कह देता हूँ मगर मुझे कभी इतनी पैसो की ज़रूरत नहीं होती की किसी से लेने पड़ें | बहुत सिमटे हुए खर्चे में जीवन चलता है | काम के अलावा किसी चीज़ से गहरी दिल्लगी नहीं है | 

सिगरेट मिलना बंद हो गया है, जैसे तैसे कहीं से दो पैकेट - वो भी तीन गुना कीमत पे ले ली हैं | एक पैकेट तो ख़त्म भी हो गई है | पूरी दुनिया को कोरोना खा रहा है | हलक तक उसके गले में लोग हैं | मुंबई में गहरा सन्नाटा है, सुर्ख़ चुप्पी बिछी है आस पास, कहीं कोई हलचल नहीं | सारे सोशल मीडिया के यूज़ से तो बुरी तरह पक गया हूँ | पता नहीं क्यों पर इस दौरान स्क्रिप्ट लिखते ही नहीं बन रही है, कभी एक सीन ऐड करता हूँ तो कभी एक डायलॉग | कहानी संग्रह अधूरा पड़ा है | कविता संग्रह एक चौथाई ही पूरा कर पाया | फिल्म का सपना तो दूर कहीं अंगड़ाई ले रहा है | अगले तीन महीने तो अब शूट की कल्पना ही बेकार है | कितने कुछ है दुनिया में लड़ने झगड़ने और सोचने विचारने को पर मन बार बार किसी के प्यार में पड़ जाने को हो रहा है |    

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