मीरा, मुझे उसने अपना नाम यही बताया था | इसके आगे-पीछे, घर-बार, शायद मैं कुछ भी नहीं जानता उसके बारे में | सन 18 के दौरान एक दिन पहली बार मैसेज आया था उसका, फेसबुक मेस्सेंजर पे | मैं बड़ा एक्टिव हूँ, और रिस्पॉन्सिव भी बहुत, उससे छुट पुट बात शुरू हो गई | न कभी हम मिले थे, न एक दूसरे को जानते थे | वो अपने किस्म की सारी छानबीन कर चुकी थी | सब जानती थी मेरे बारे में, मतलब भोपाल के दिनों का पूरा लेखा जोखा था उसके पास | वैसे मेरे बारे में कुछ भी जानना बहुत मुश्किल नहीं है, हर सोशल मीडिया पर ऑलमोस्ट सब पड़ा है | बातों बातों में उसकी दिलचस्पी तो समझ आ गई थी | पर कुछ भी कहने से डर रही थी | सो मैंने उसे थोड़ा कुरेदा | जिस दिन मैंने कुरेदा तो न नुकुर करती रही | फिर अगले दिन कॉल करके बोली की 'वो मुझे पसंद करती है', यह अपनी ज़िंदगी में पहली बार था | कोई लड़की खुद से, इतनी छान बीन करके यह बोलने वाली थी | अनएक्सपेक्टेड, ऐसा भी होता है क्या? मन में थोड़ी गुदगुदी हुई | सख्ती दिखाने के लिए अपन को कोई कोशिश नहीं करनी पढ़ती, अंदरूनी है अपने भीतर | अब सवाल आता है दिखती कैसी है? यह बात अपने लिए अब तो मैटर करती थी | मैंने कहा की वो अपने फोटोग्राफ्स भेजे | फिर उसने न नुकुर करना शुरू कर दिया | "यार पता नहीं मैं कैसी दिखती हूँ? तुम क्या सोचोगे मेरे बारे में? फलाना ढिकाना ! मैंने कहा 'Listen, I'm not in love with you. तो ज़ाहिर है मैं तो सोच ही नहीं रहा हूँ कुछ | उसने तस्वीरें भेजीं और अपन को पसंद नहीं आईं | मैंने कहा, प्यार व्यार तो नहीं हो पायेगा, पर लगता है तो जुड़ी रह सकती है, कभी कभार बातचीत कर सकती है | और अपनी तरफ से चैप्टर क्लोज हो गया |
लगभग सालभर बाद भोपाल गया तो न जाने कैसे मैंने मीरा को मैसेज कर दिया | थोड़ी देर बात हुई और उसने मुझे 'I love you' बोल दिया | मेरे लिए ये तो और भी ज़्यादा अनएक्सपेक्टेड था | हमारी तो बातचीत भी नहीं हो रही थी | साल भर पहले भी हमारी गिनी चुनी बातें हुईं थीं | पर पहली बार कोई इज़हार करे, आत्मा तृप्त हो जाती है | अपने लिए ये पहली बार था, इससे पहले तो दिल ही दुख था | बहरहाल, मैं अकेला ही था तो मैंने उसे मिलने का ऑफर दिया | मैं उसे समझाना ही चाहता था की असल में उसे कोई और मिल जायेगा, मुझे उसके साथ वो वाइब्स ही फील नहीं हुई थी जिसका होना ज़रूरी था | मैं महसूस कर चूका था की मैं कभी उसके प्रेम में नहीं पढ़ सकता |
जो भी हो दो घण्टे बाद वो मिलने चली आई | थोड़ी देर यहाँ वहाँ की बात हुई, चाहे उत्सुकता रही हो या सोशल प्रेशर, मैंने उसके सामने सेक्स का प्रस्ताव रख दिया और वो न भी न कर पाई | उसके बाद मुझे अजीब सी खीझ हुई | मैंने उसके और मेरे प्यार में पड़ने की नीव डाल दी थी | रात को उसका मैसेज आया, तुमने मुझे न कॉल किया न मैसेज? जैसे तैसे मैंने बात को जाने दिया | अगली सुबह मेरे जागने से पहले ही उसका मैसेज आ गया की वो फिर से सेक्स करना चाहती है | मैंने उसे कंडोम साथ लाने को कहा | इच्छाएँ आपको गहरे में डुबोती हैं | मुझे पता था की एक दो दिन बाद उस पर कहर टूटने वाला है, पर न मैं खुद को रोक सका न उसे |
मैं बॉम्बे वापस आ गया | एक दो दिन बात हुई और उसे लगने लगा की मैं उसके लिए बिलकुल सीरियस नहीं हूँ | बर्दास्त करने की क्षमता, और सच के परिणाम का डर कभी रहा नहीं सो मैंने उसे कह दिया की मैंने उसे पहले ही कहा था की मैं उसके प्यार में नहीं हूँ | हो सकता हूँ? पर इस वक़्त मैं कन्फर्म कर रहा हूँ की मुझे उससे कभी प्यार नहीं हो सकता | फिर मेरे हिस्से चार छै खरी खोटी बातें आईं | अफरा तफरी में उसने मुझे ब्लॉक कर दिया | और मुझे लगा की किस्सा ख़त्म हो गया | मुझ खुद से थोड़ी घृणा हुई | जाने अनजाने 'यूज़ एंड थ्रो', वाली बात हो गई थी | मैं इतना बुरा हो गया था मुझे इसका अंदाज़ा अब लगा |
छै आठ महीने गुजर गए, मैंने उसे इस बार सिर्फ दोस्ती का प्रस्ताव दिया | पर प्रेम का अंत कभी दोस्ती नहीं हो सकती | अब तक का लेखा जोखा यही है | दुःख इस बात का उसकी चाह के बदले उसे कुछ दे न सका | और मैंने खुद को वहां शुमार कर लिया जहाँ मैं कभी नहीं होना चाहता था | एक दिन उसके हिस्से कोई कमाल का प्रेमी आए | वो मेरे हिस्से आई सबसे पहली समर्पित प्रेमिका थी | मेरे जीवन में यह उसका हिस्सा है |
लगभग सालभर बाद भोपाल गया तो न जाने कैसे मैंने मीरा को मैसेज कर दिया | थोड़ी देर बात हुई और उसने मुझे 'I love you' बोल दिया | मेरे लिए ये तो और भी ज़्यादा अनएक्सपेक्टेड था | हमारी तो बातचीत भी नहीं हो रही थी | साल भर पहले भी हमारी गिनी चुनी बातें हुईं थीं | पर पहली बार कोई इज़हार करे, आत्मा तृप्त हो जाती है | अपने लिए ये पहली बार था, इससे पहले तो दिल ही दुख था | बहरहाल, मैं अकेला ही था तो मैंने उसे मिलने का ऑफर दिया | मैं उसे समझाना ही चाहता था की असल में उसे कोई और मिल जायेगा, मुझे उसके साथ वो वाइब्स ही फील नहीं हुई थी जिसका होना ज़रूरी था | मैं महसूस कर चूका था की मैं कभी उसके प्रेम में नहीं पढ़ सकता |
जो भी हो दो घण्टे बाद वो मिलने चली आई | थोड़ी देर यहाँ वहाँ की बात हुई, चाहे उत्सुकता रही हो या सोशल प्रेशर, मैंने उसके सामने सेक्स का प्रस्ताव रख दिया और वो न भी न कर पाई | उसके बाद मुझे अजीब सी खीझ हुई | मैंने उसके और मेरे प्यार में पड़ने की नीव डाल दी थी | रात को उसका मैसेज आया, तुमने मुझे न कॉल किया न मैसेज? जैसे तैसे मैंने बात को जाने दिया | अगली सुबह मेरे जागने से पहले ही उसका मैसेज आ गया की वो फिर से सेक्स करना चाहती है | मैंने उसे कंडोम साथ लाने को कहा | इच्छाएँ आपको गहरे में डुबोती हैं | मुझे पता था की एक दो दिन बाद उस पर कहर टूटने वाला है, पर न मैं खुद को रोक सका न उसे |
मैं बॉम्बे वापस आ गया | एक दो दिन बात हुई और उसे लगने लगा की मैं उसके लिए बिलकुल सीरियस नहीं हूँ | बर्दास्त करने की क्षमता, और सच के परिणाम का डर कभी रहा नहीं सो मैंने उसे कह दिया की मैंने उसे पहले ही कहा था की मैं उसके प्यार में नहीं हूँ | हो सकता हूँ? पर इस वक़्त मैं कन्फर्म कर रहा हूँ की मुझे उससे कभी प्यार नहीं हो सकता | फिर मेरे हिस्से चार छै खरी खोटी बातें आईं | अफरा तफरी में उसने मुझे ब्लॉक कर दिया | और मुझे लगा की किस्सा ख़त्म हो गया | मुझ खुद से थोड़ी घृणा हुई | जाने अनजाने 'यूज़ एंड थ्रो', वाली बात हो गई थी | मैं इतना बुरा हो गया था मुझे इसका अंदाज़ा अब लगा |
छै आठ महीने गुजर गए, मैंने उसे इस बार सिर्फ दोस्ती का प्रस्ताव दिया | पर प्रेम का अंत कभी दोस्ती नहीं हो सकती | अब तक का लेखा जोखा यही है | दुःख इस बात का उसकी चाह के बदले उसे कुछ दे न सका | और मैंने खुद को वहां शुमार कर लिया जहाँ मैं कभी नहीं होना चाहता था | एक दिन उसके हिस्से कोई कमाल का प्रेमी आए | वो मेरे हिस्से आई सबसे पहली समर्पित प्रेमिका थी | मेरे जीवन में यह उसका हिस्सा है |
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