फरवरी
में थोड़ा काम से
वास्ता पढ़ रहा है
| चार (तारीख़) को लगभग प्रोजेक्ट
शुरू हुआ था और
20 तक चला | पूरी एनर्जी एक
एड में लगी रही
फिर भी यहाँ के
लोग पैसा देने में
बहुत रोना गाना करते
हैं | अगर सच में
प्रोफेशनल लोगों से वास्ता नहीं
पड़ा तो बॉम्बे में
ज़िंदगी की जद्दोज़हद बढ़
जाएगी | स्क्रिप्ट अब भी अधूरी
है जल्द पूरी करना
है | फिल्म का सपना अभी
बाक़ी है |
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