रिया अलहदा पागल है | एक दिन अनजाने नम्बर से एक लड़की का फ़ोन आया उसने मुझे एक दुखभरी कहानी सुनाई | लिहाज़ा मैं पहली बार किसी ऐसी लड़की से भिड़ रहा था सो मैंने उसे कंधा दे दिया | उसने कहा की क्या हम दोस्त हो सकते हैं? इसमें अचरज तो कुछ था नहीं, मैंने हाँ बोल दिया | दूसरे दिन बात पसंद तक आ गई | दो चार दिन बीतें होंगे और उसने प्रोपोज़ कर दिया | कुछ दिन मैंने टाला |असल में मैं भी किसी के प्यार में पढ़ना चाहता था पर हमारी frequency कतई मैच नहीं कर रही थी, सो मैंने उसे रिप्लाई करने में कोई जल्दबाज़ी नहीं की | मैंने बस उसे यह विश्वास दिलाया की अपने पास्ट से बाहर निकलने में अगर उसे लगता है की मेरी ज़रूरत है, तो अपने अकेलेपन में मुझसे बात कर सकती है | गुरु पास्ट तो हमारा भी है पर रोना गाना किसी के सामने नहीं किया | सिवाय एक दोस्त के वो भी इसलिए क्यूंकि वो जिगरी है | और जिगरी यार तो जिगरी होते हैं, वो होते ही इसलिए हैं की हम उनके सामने रो सकें | और आखिरकार मुझे समझ आया की उसका रोना फितरती है, जो बिलकुल मेरे बर्दास्त के बाहर है | मैंने उसे सॉरी कहा और किसी भी किस्म का रिश्ता न रखने की बात कही | क्यूंकि असल में, मैं उनकी बिलकुल मदद नहीं कर सकता जो खुद अपनी हेल्प नहीं चाहते | चंद रोज़ पहले कइयों बार उसके कॉल आने, इज़हार करने के बाद आखिरकार यह किस्सा भी तमाम हुआ |
Sunday, 26 April 2020
न हुई तब्दीली
सीमा से मैं हमेशा कहना चाह रहा था की मैं असल में वो नहीं हूँ जिसे वो तलाश रही है | वो कभी कभार कोशिश करती रही और अपने खाली वक़्त में, मैं उसे कभी कभार बात| दोस्तियाँ आजकल बहुत अस्थिर होती हैं या होती ही नहीं हैं | जब उसने मुझसे बातचीत थी, मैं समझ गया था वो मुझे पसंद करती है | किस्सा पसंद या प्यार से शुरू हो तो औंधे मुहँ गिरता है | कुछ दिनों बाद न नुकुर करते हुए उसने एक दिन कह दिया की वो मुझे पसंद करती है | मैंने कहा जाने दो | बाबजूद एक दिन उसने मुझे प्रोपोज़ कर दिया | उस वक़्त मैंने यह कह कर की मैं दूर दराज़ रहने वालों के प्यार में नहीं पड़ता मैंने टाल दिया और मैं टालता रहा | टालना कभी किसी निर्णय तक नहीं ले के जाता | किसी एक को तो आगे चलना होता है अक्सर मैं यह गलती करता हूँ सो चंद रोज़ पहले हर तरह से मैंने उसे ब्लॉक कर दिया | प्रेम और पसंद असल में दोस्ती में तब्दील हो यह वाकई मुश्किल है | दोस्त दोस्त की तरह मिलना चाहिए |
Saturday, 18 April 2020
दिन
पिछले दो तीन दिन से बहुत कोशिश के बाद भी न कुछ लिख पा रहा हूँ न पढ़ पा रहा हूँ | सिनेमा देखना तो हो जाता है, पर कल एक फिल्म शुरू की थी जिसे देखते देखते आधे में ही मन ऊब गया | सोचा था लॉकडाउन के चलते बाहर नहीं जा सकते इस बहाने लिखना पढ़ना हो जाएगा | मन स्थिर होने की जगह और बहक रहा है | सिग्रेट की डिब्बी में आख़िरी सिगरेट बची है | कॉफ़ी भी आज पीने की इच्छा नहीं हुई |
बहुत ज़द्दोजहद हो गई लेकिन फिल्म लिख पाना नहीं हो पा रहा है | इस साल हर हाल में एक फिल्म बनानी है जो पुरानी स्क्रिप्ट लिखी पड़ी हैं काफ़ी पेचीदा है और उनमे तामझाम भी है | सरल लिखना इतना कठिन क्यों होता है? बहरहाल, सरलता के पायदान तक हर हाल में पहुंचना है | ख़ुद को काबिल एनर्जी देते रहना है फिल्म तो मक़सद है, ज़िंदगी है उसके अलावा तो मैं कुछ नहीं | कैसे कोई कहानी मुझ तक पहुंचेगी, कैसे मैं कहानी तक रास्ता इख्तियार करूंगा पता नहीं | करना है, हर हाल में करना है बस |
दरमियाँ, हमारे पहले गाने का म्यूजिक ऑलमोस्ट तैयार हो गया है | आशीष भाई खूब मेहनत कर रहे हैं संगीत बनवाने पे | अभी रफ़ कट भेजा था, पसंद आया | अब उसके वीडियो मेकिंग और कास्टिंग से जुडी ज़रूरतों पे काम करना है | एक अच्छी मार्केटिंग टीम ने चैनल के प्रमोशन पे काम करना शुरू कर दिया है | उम्मीद है, हमारा तुरुप हमारे लिए सही शाबित हो |
बहुत ज़द्दोजहद हो गई लेकिन फिल्म लिख पाना नहीं हो पा रहा है | इस साल हर हाल में एक फिल्म बनानी है जो पुरानी स्क्रिप्ट लिखी पड़ी हैं काफ़ी पेचीदा है और उनमे तामझाम भी है | सरल लिखना इतना कठिन क्यों होता है? बहरहाल, सरलता के पायदान तक हर हाल में पहुंचना है | ख़ुद को काबिल एनर्जी देते रहना है फिल्म तो मक़सद है, ज़िंदगी है उसके अलावा तो मैं कुछ नहीं | कैसे कोई कहानी मुझ तक पहुंचेगी, कैसे मैं कहानी तक रास्ता इख्तियार करूंगा पता नहीं | करना है, हर हाल में करना है बस |
दरमियाँ, हमारे पहले गाने का म्यूजिक ऑलमोस्ट तैयार हो गया है | आशीष भाई खूब मेहनत कर रहे हैं संगीत बनवाने पे | अभी रफ़ कट भेजा था, पसंद आया | अब उसके वीडियो मेकिंग और कास्टिंग से जुडी ज़रूरतों पे काम करना है | एक अच्छी मार्केटिंग टीम ने चैनल के प्रमोशन पे काम करना शुरू कर दिया है | उम्मीद है, हमारा तुरुप हमारे लिए सही शाबित हो |
Monday, 6 April 2020
सन्नाटे का शोर
सिगरेट, कॉफ़ी और डायरी लेकर सीढ़ियों पे बैठ गया आज, जब से लॉक डाउन हुआ है कमरे के कोने में पड़े पड़े बेतहाशा बोर हो गया था | लगातार लिख रहा था, फ़िल्में देख रहा था, आजकल पड़ने का मन नहीं है | पिछले दो दिनों से लाइव गेमिंग के बहाने दिल बहला रहा हूँ | काम ही जो मुझे ज़िंदा रखता है | दोनों रूममेट अपनी प्रेमिकाओं के साथ मसगूल हो जाते हैं | अपनी जिंदगी में कोई ख़ास जैसा नहीं है, जिससे बात की जा सके इसलिए इन दिनों बोरियत ज़्यादा रहती है | बीती रात एक निर्णय तो कर ही लिया था जिसपे पिछली पोस्ट लिख दी है अब और उसके बारे में नहीं सोचूंगा | पड़ोस में एक अंकल रहते हैं | मुस्लिम हैं, बड़ा ही नेक दिल है | मैंने अब तक उनका नाम नहीं पूछा | अक्सर आते जाते जब भी टकराते हैं, ख्याल पूछते हैं | लॉकडाउन से पहले से कह रहे हैं पैसे ले जाओ और घर जाओ | ज़रूरत हो तो कह देना, कभी भी कितने भी पैसे की | मैं हाँ कह देता हूँ मगर मुझे कभी इतनी पैसो की ज़रूरत नहीं होती की किसी से लेने पड़ें | बहुत सिमटे हुए खर्चे में जीवन चलता है | काम के अलावा किसी चीज़ से गहरी दिल्लगी नहीं है |
सिगरेट मिलना बंद हो गया है, जैसे तैसे कहीं से दो पैकेट - वो भी तीन गुना कीमत पे ले ली हैं | एक पैकेट तो ख़त्म भी हो गई है | पूरी दुनिया को कोरोना खा रहा है | हलक तक उसके गले में लोग हैं | मुंबई में गहरा सन्नाटा है, सुर्ख़ चुप्पी बिछी है आस पास, कहीं कोई हलचल नहीं | सारे सोशल मीडिया के यूज़ से तो बुरी तरह पक गया हूँ | पता नहीं क्यों पर इस दौरान स्क्रिप्ट लिखते ही नहीं बन रही है, कभी एक सीन ऐड करता हूँ तो कभी एक डायलॉग | कहानी संग्रह अधूरा पड़ा है | कविता संग्रह एक चौथाई ही पूरा कर पाया | फिल्म का सपना तो दूर कहीं अंगड़ाई ले रहा है | अगले तीन महीने तो अब शूट की कल्पना ही बेकार है | कितने कुछ है दुनिया में लड़ने झगड़ने और सोचने विचारने को पर मन बार बार किसी के प्यार में पड़ जाने को हो रहा है |
सिगरेट मिलना बंद हो गया है, जैसे तैसे कहीं से दो पैकेट - वो भी तीन गुना कीमत पे ले ली हैं | एक पैकेट तो ख़त्म भी हो गई है | पूरी दुनिया को कोरोना खा रहा है | हलक तक उसके गले में लोग हैं | मुंबई में गहरा सन्नाटा है, सुर्ख़ चुप्पी बिछी है आस पास, कहीं कोई हलचल नहीं | सारे सोशल मीडिया के यूज़ से तो बुरी तरह पक गया हूँ | पता नहीं क्यों पर इस दौरान स्क्रिप्ट लिखते ही नहीं बन रही है, कभी एक सीन ऐड करता हूँ तो कभी एक डायलॉग | कहानी संग्रह अधूरा पड़ा है | कविता संग्रह एक चौथाई ही पूरा कर पाया | फिल्म का सपना तो दूर कहीं अंगड़ाई ले रहा है | अगले तीन महीने तो अब शूट की कल्पना ही बेकार है | कितने कुछ है दुनिया में लड़ने झगड़ने और सोचने विचारने को पर मन बार बार किसी के प्यार में पड़ जाने को हो रहा है |
Saturday, 4 April 2020
वासना की दरार
मीरा, मुझे उसने अपना नाम यही बताया था | इसके आगे-पीछे, घर-बार, शायद मैं कुछ भी नहीं जानता उसके बारे में | सन 18 के दौरान एक दिन पहली बार मैसेज आया था उसका, फेसबुक मेस्सेंजर पे | मैं बड़ा एक्टिव हूँ, और रिस्पॉन्सिव भी बहुत, उससे छुट पुट बात शुरू हो गई | न कभी हम मिले थे, न एक दूसरे को जानते थे | वो अपने किस्म की सारी छानबीन कर चुकी थी | सब जानती थी मेरे बारे में, मतलब भोपाल के दिनों का पूरा लेखा जोखा था उसके पास | वैसे मेरे बारे में कुछ भी जानना बहुत मुश्किल नहीं है, हर सोशल मीडिया पर ऑलमोस्ट सब पड़ा है | बातों बातों में उसकी दिलचस्पी तो समझ आ गई थी | पर कुछ भी कहने से डर रही थी | सो मैंने उसे थोड़ा कुरेदा | जिस दिन मैंने कुरेदा तो न नुकुर करती रही | फिर अगले दिन कॉल करके बोली की 'वो मुझे पसंद करती है', यह अपनी ज़िंदगी में पहली बार था | कोई लड़की खुद से, इतनी छान बीन करके यह बोलने वाली थी | अनएक्सपेक्टेड, ऐसा भी होता है क्या? मन में थोड़ी गुदगुदी हुई | सख्ती दिखाने के लिए अपन को कोई कोशिश नहीं करनी पढ़ती, अंदरूनी है अपने भीतर | अब सवाल आता है दिखती कैसी है? यह बात अपने लिए अब तो मैटर करती थी | मैंने कहा की वो अपने फोटोग्राफ्स भेजे | फिर उसने न नुकुर करना शुरू कर दिया | "यार पता नहीं मैं कैसी दिखती हूँ? तुम क्या सोचोगे मेरे बारे में? फलाना ढिकाना ! मैंने कहा 'Listen, I'm not in love with you. तो ज़ाहिर है मैं तो सोच ही नहीं रहा हूँ कुछ | उसने तस्वीरें भेजीं और अपन को पसंद नहीं आईं | मैंने कहा, प्यार व्यार तो नहीं हो पायेगा, पर लगता है तो जुड़ी रह सकती है, कभी कभार बातचीत कर सकती है | और अपनी तरफ से चैप्टर क्लोज हो गया |
लगभग सालभर बाद भोपाल गया तो न जाने कैसे मैंने मीरा को मैसेज कर दिया | थोड़ी देर बात हुई और उसने मुझे 'I love you' बोल दिया | मेरे लिए ये तो और भी ज़्यादा अनएक्सपेक्टेड था | हमारी तो बातचीत भी नहीं हो रही थी | साल भर पहले भी हमारी गिनी चुनी बातें हुईं थीं | पर पहली बार कोई इज़हार करे, आत्मा तृप्त हो जाती है | अपने लिए ये पहली बार था, इससे पहले तो दिल ही दुख था | बहरहाल, मैं अकेला ही था तो मैंने उसे मिलने का ऑफर दिया | मैं उसे समझाना ही चाहता था की असल में उसे कोई और मिल जायेगा, मुझे उसके साथ वो वाइब्स ही फील नहीं हुई थी जिसका होना ज़रूरी था | मैं महसूस कर चूका था की मैं कभी उसके प्रेम में नहीं पढ़ सकता |
जो भी हो दो घण्टे बाद वो मिलने चली आई | थोड़ी देर यहाँ वहाँ की बात हुई, चाहे उत्सुकता रही हो या सोशल प्रेशर, मैंने उसके सामने सेक्स का प्रस्ताव रख दिया और वो न भी न कर पाई | उसके बाद मुझे अजीब सी खीझ हुई | मैंने उसके और मेरे प्यार में पड़ने की नीव डाल दी थी | रात को उसका मैसेज आया, तुमने मुझे न कॉल किया न मैसेज? जैसे तैसे मैंने बात को जाने दिया | अगली सुबह मेरे जागने से पहले ही उसका मैसेज आ गया की वो फिर से सेक्स करना चाहती है | मैंने उसे कंडोम साथ लाने को कहा | इच्छाएँ आपको गहरे में डुबोती हैं | मुझे पता था की एक दो दिन बाद उस पर कहर टूटने वाला है, पर न मैं खुद को रोक सका न उसे |
मैं बॉम्बे वापस आ गया | एक दो दिन बात हुई और उसे लगने लगा की मैं उसके लिए बिलकुल सीरियस नहीं हूँ | बर्दास्त करने की क्षमता, और सच के परिणाम का डर कभी रहा नहीं सो मैंने उसे कह दिया की मैंने उसे पहले ही कहा था की मैं उसके प्यार में नहीं हूँ | हो सकता हूँ? पर इस वक़्त मैं कन्फर्म कर रहा हूँ की मुझे उससे कभी प्यार नहीं हो सकता | फिर मेरे हिस्से चार छै खरी खोटी बातें आईं | अफरा तफरी में उसने मुझे ब्लॉक कर दिया | और मुझे लगा की किस्सा ख़त्म हो गया | मुझ खुद से थोड़ी घृणा हुई | जाने अनजाने 'यूज़ एंड थ्रो', वाली बात हो गई थी | मैं इतना बुरा हो गया था मुझे इसका अंदाज़ा अब लगा |
छै आठ महीने गुजर गए, मैंने उसे इस बार सिर्फ दोस्ती का प्रस्ताव दिया | पर प्रेम का अंत कभी दोस्ती नहीं हो सकती | अब तक का लेखा जोखा यही है | दुःख इस बात का उसकी चाह के बदले उसे कुछ दे न सका | और मैंने खुद को वहां शुमार कर लिया जहाँ मैं कभी नहीं होना चाहता था | एक दिन उसके हिस्से कोई कमाल का प्रेमी आए | वो मेरे हिस्से आई सबसे पहली समर्पित प्रेमिका थी | मेरे जीवन में यह उसका हिस्सा है |
लगभग सालभर बाद भोपाल गया तो न जाने कैसे मैंने मीरा को मैसेज कर दिया | थोड़ी देर बात हुई और उसने मुझे 'I love you' बोल दिया | मेरे लिए ये तो और भी ज़्यादा अनएक्सपेक्टेड था | हमारी तो बातचीत भी नहीं हो रही थी | साल भर पहले भी हमारी गिनी चुनी बातें हुईं थीं | पर पहली बार कोई इज़हार करे, आत्मा तृप्त हो जाती है | अपने लिए ये पहली बार था, इससे पहले तो दिल ही दुख था | बहरहाल, मैं अकेला ही था तो मैंने उसे मिलने का ऑफर दिया | मैं उसे समझाना ही चाहता था की असल में उसे कोई और मिल जायेगा, मुझे उसके साथ वो वाइब्स ही फील नहीं हुई थी जिसका होना ज़रूरी था | मैं महसूस कर चूका था की मैं कभी उसके प्रेम में नहीं पढ़ सकता |
जो भी हो दो घण्टे बाद वो मिलने चली आई | थोड़ी देर यहाँ वहाँ की बात हुई, चाहे उत्सुकता रही हो या सोशल प्रेशर, मैंने उसके सामने सेक्स का प्रस्ताव रख दिया और वो न भी न कर पाई | उसके बाद मुझे अजीब सी खीझ हुई | मैंने उसके और मेरे प्यार में पड़ने की नीव डाल दी थी | रात को उसका मैसेज आया, तुमने मुझे न कॉल किया न मैसेज? जैसे तैसे मैंने बात को जाने दिया | अगली सुबह मेरे जागने से पहले ही उसका मैसेज आ गया की वो फिर से सेक्स करना चाहती है | मैंने उसे कंडोम साथ लाने को कहा | इच्छाएँ आपको गहरे में डुबोती हैं | मुझे पता था की एक दो दिन बाद उस पर कहर टूटने वाला है, पर न मैं खुद को रोक सका न उसे |
मैं बॉम्बे वापस आ गया | एक दो दिन बात हुई और उसे लगने लगा की मैं उसके लिए बिलकुल सीरियस नहीं हूँ | बर्दास्त करने की क्षमता, और सच के परिणाम का डर कभी रहा नहीं सो मैंने उसे कह दिया की मैंने उसे पहले ही कहा था की मैं उसके प्यार में नहीं हूँ | हो सकता हूँ? पर इस वक़्त मैं कन्फर्म कर रहा हूँ की मुझे उससे कभी प्यार नहीं हो सकता | फिर मेरे हिस्से चार छै खरी खोटी बातें आईं | अफरा तफरी में उसने मुझे ब्लॉक कर दिया | और मुझे लगा की किस्सा ख़त्म हो गया | मुझ खुद से थोड़ी घृणा हुई | जाने अनजाने 'यूज़ एंड थ्रो', वाली बात हो गई थी | मैं इतना बुरा हो गया था मुझे इसका अंदाज़ा अब लगा |
छै आठ महीने गुजर गए, मैंने उसे इस बार सिर्फ दोस्ती का प्रस्ताव दिया | पर प्रेम का अंत कभी दोस्ती नहीं हो सकती | अब तक का लेखा जोखा यही है | दुःख इस बात का उसकी चाह के बदले उसे कुछ दे न सका | और मैंने खुद को वहां शुमार कर लिया जहाँ मैं कभी नहीं होना चाहता था | एक दिन उसके हिस्से कोई कमाल का प्रेमी आए | वो मेरे हिस्से आई सबसे पहली समर्पित प्रेमिका थी | मेरे जीवन में यह उसका हिस्सा है |
Friday, 3 April 2020
लेने के देने
ब्लॉग पर एड लगाने के चक्कर में पूरी साईट का HTML गड़बढ़ हो गया और लेने के देने पढ़ गए | पूरा ब्लॉग दोबारा डिज़ाइन किया सारे पोस्ट लिखने पड़े और अब ब्लॉग को customise भी करना है | मैं भी पता नहीं क्या क्या फालतू चीज़ें एक्स्प्लोर करने लगता हूँ | अब वक़्त जाया नहीं करूंगा | इस बार सीख लिया है | अपने काम से काम रखो ज़्यादा एक्स्प्लोर मत करो नहीं तो लेने के देने पढ़ जाते हैं | अब पता नहीं डोमेन का DNS कनेक्ट होगा की नहीं | चलो, हाथ पैर फेंको धर्म बाबू, फिर से सारा तामझाम खड़ा करना है |
अतीत से अब तक
2017 में ब्लॉग
शुरू किया था | 18 के
जून तक पहला कविता
संग्रह आ गया था
| ब्लॉग के थ्रू गया
तो देखा 19 में एक शब्द
भी नहीं लिखा गया
| 19 भोपाल से बम्बई में
शिफ्टिंग की ज़द्दोजहद का
समय रहा पर इतना
समय भी नहीं लगता
| ज़्यादा कोशिश 'रोल' हासिल करने
की कोशिश में बीता | अंततः
सारी कोशिश बेबुनियाद रही लेकिन इतना
तो है की वो
सारे रास्ते पता चल गए
जिन पर नहीं चलना
है | नोटबुक का निर्माण भी
18 की बात है | 20 का
चौथा महीने लगने वाला है
अब फिर से कोशिशों
का रुख उसी तरफ
मोड़ना है जैसा भोपाल
के दिनों में था | कितना
सारा थिएटर, लेखन, फिल्म निर्माण, अभिनय सब कर लेता
था | पिछले साल बम्बई में
खाली ज़्यादा गुज़रा और काम काम
किया | नीरज पांडेय निर्देशित
'Special Ops' रिलीज़ हुई है कुछ
समय बतौर कास्टिंग असिस्टेंट
उसमे काम किया था
| कुछ समय बाद उसे
भी बीच में छोड़
दिया और अच्छा हुआ
| देर आय दुरुस्त आये,
समझ तो आया क्या
नहीं करना है | पिछली
जुलाई के दौरान 'धीरज
मिश्रा' एपिसोडिक सीरियल 'वीर क्रांतिकारी' में
अभिनय किया था पर
उसकी झलकियां देखी नहीं | पर
इस साल मार्च में
अमित सैनी सर ने
क्राइम अलर्ट के एक एपिसोड
में कास्ट कर दिया | एक
मिनट का एक ही
सीन था मेरी करने
की मंशा तो नहीं
थी पर सर को
मैं न कह न
सका | घर में सबने
एपिसोड देखा | सब खुश थे
| मैंने भी खुद की
पहली बार टीवी पर
झलकियां देखीं | स्क्रीन पे होने की
ख़ुशी सचमुच अलग होगी | अभी
वो रास्ता जितना सोचा है उतना
इख्तियार करना है | फरवरी
अनुभवों से भरा हुआ
रहा | रिलायंस मार्किट के एक कमर्शियल
में बतौर कास्टिंग एसोसिएट
और असिस्टेंट डायरेक्टर भी जुड़ा रहा
| असिस्टेंट डायरेक्टर के काम का
यह पहला अनुभव था
| बहरहाल इस साल की
शुरुआत खूबसूरत हुई है | काम
की भी शुरुआत बन
रही है | अच्छे लोगों
से वास्ता भी पढ़ रहा
है और अपना काम
भी मैंने नए सिरे से शुरू
कर दिया है |
उम्मीद की चाल
फरवरी
में थोड़ा काम से
वास्ता पढ़ रहा है
| चार (तारीख़) को लगभग प्रोजेक्ट
शुरू हुआ था और
20 तक चला | पूरी एनर्जी एक
एड में लगी रही
फिर भी यहाँ के
लोग पैसा देने में
बहुत रोना गाना करते
हैं | अगर सच में
प्रोफेशनल लोगों से वास्ता नहीं
पड़ा तो बॉम्बे में
ज़िंदगी की जद्दोज़हद बढ़
जाएगी | स्क्रिप्ट अब भी अधूरी
है जल्द पूरी करना
है | फिल्म का सपना अभी
बाक़ी है |
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