कितना कुछ कर लेने के बाद लगता है कितन कुछ बचा है करने को | थोड़ा करने की ख़ुशी, थोड़ा और करने की लालसा में बदल जाती है | महज़ छोटी छोटी सफलताएँ कितनी ख़ुशी देती हैं | हालिया मेरी एक शोर्ट फिल्म रिलीज़ हुई और फिल्म की पब्लिसिटी से पापा बेहद खुश थे | पहले ऐसा नहीं था, पर अब पापा की खुशियाँ महत्वपूर्ण हैं | उन्हें खुश देखकर अच्छा लगता है | पर एक के बाद दूसरा काम करना कितना जटिल होता जाता है | महज़ ये ख्याल रह जाता है की आगे अब क्या?