Monday, 10 October 2022

विदा

निर्णय लेने का वक़्त तो आना ही था | पर शायद इस वक़्त न आता तो अच्छा होता | वो हॉस्पिटल में हैं, उसे मेरी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है | लगता है ठीक ही हुआ, कठिन समय में जब वो रास्ता तय करेगी तो उसके दिल का आक़ार पता चल जायेगा की असल में वो उसकी बातों से बड़ा है या नहीं? 

किसी रिश्ते में कितना अहम् है की प्रेयशी अपने प्रेमी के स्वाभिमान की रक्षा कर पाती है या नहीं? दूसरों के लिए पता नहीं | मेरे लिए है, बहुत ज्यादा | उसके किये हुए वादों से ज्यादा | जुबान क्षणिक वक़्त की बात बयान करती है, रवैया कुछ देर की और चरित्र जीवन की |  क्या आपका अतीत और वर्तमान बराबर हो सकता हैं? नहीं? दो लोगों में एक बराबर ग्रेविटी नहीं हो सकती | मैं तुम्हारें दुखों या कमजोरियों के कारण तुमसे दूर नहीं जा रहा हूँ | कमजोरियों को बल में बदलना तो मेरी फितरत है-

"मैंने अपनी जड़ों के विपरीत विचारधारा पाई है, जन्म के विपरीत जीवन"

मेरे तुमसे दूर जाने का कारण सिर्फ इतना है... और हो सकता है तुम वो सब न समझती हो? पर प्रेयशी को अगर अपने प्रेमी के स्वाभिमान की रक्षा करना न आता हो, प्रेमी के लिए उससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है? तुम्हारे साथ मेरा होना संभव नहीं है | मैं जीते जी मर जाऊंगा | शायद तुम्हें अंदाज़ा होता, प्रेम की तुलना प्रेम का अपमान है | जीवन में इससे बड़ा कोई अपमान नहीं होता | 

प्रेमी दुनिया के हाथों हज़ारों बार मारा जाए तो उठ खड़ा हो सकता है | वो अपनी प्रेमिका के द्वारा मारा जाना बर्दास्त नहीं कर सकता | अलविदा | 


Monday, 14 March 2022

अब

कितना कुछ कर लेने के बाद लगता है कितन कुछ बचा है करने को | थोड़ा करने की ख़ुशी, थोड़ा और करने की  लालसा में बदल जाती है | महज़ छोटी छोटी सफलताएँ कितनी ख़ुशी देती हैं | हालिया मेरी एक शोर्ट फिल्म रिलीज़ हुई और फिल्म की पब्लिसिटी से पापा बेहद खुश थे | पहले ऐसा नहीं था, पर अब पापा की खुशियाँ महत्वपूर्ण हैं | उन्हें खुश देखकर अच्छा लगता है | पर एक के बाद दूसरा काम करना कितना जटिल होता जाता है | महज़ ये ख्याल रह जाता है की आगे अब क्या?